3 सबसे मजेदार गणेश जी की कहानी | Stories of Lord Ganesha

गणेश जी 3 सबसे मजेदार की कहानी 

गणेश जी की कहानी | वैसे तो हिन्दू मान्यताओं मे अनगिनत देवता हैं  लेकिन गणेश भगवान सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला हिन्दू भगवान हैं। किसी भी चीज की शुभारंभ  करने से पहले गणेश जी की ही पूजा किया जाता हैं।  

गणेश जी की कहानी
गणेश जी 


आप सभी को गणेश जी की कहानी पता होनी चाहिए।  इस पोस्ट मे मैं आपको गणेश जी की 3 सबसे मजेदार कहानी  के बारे मे बताऊँगा। 

गणेश जी की हाथी सिर की कहानी 

गणेश जी को हम हमेशा हाथी सिर के साथ ही देखते हैं। परंतु शुरू से ऐसा नहीं था। एक बार माता पार्वती को स्नान करना था और कोई रक्षक नहीं था। पार्वती ने तुरंत चंदन के लोई से गणेश जो को बनाया। 

गणेश जी माता पार्वती की रक्षा कर रही होती हैं इसी दौरान शिव जी आ जाते हैं।  शिव जी अंदर जाना चाहते थे लेकिन गणेश जी उसे अंदर नहीं जाने देते। फिर शिव जी अपने  बैल नंदी को उससे लड़ने भेजते हैं। गणेश जी नंदी को भी हरा देते हैं।  अब शिव जी को गुस्सा आ जाता हैं और वे अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। 

जब माता पार्वती बाहर आती हैं तो वे बहुत रोती हैं। माता पार्वती शिव जी से बाल गणेश को पुनः जीवित करने को कहती हैं। शिव जी राजी हो जाते हैं और कहते हैं- मैं इसे जीवित कर सकता हूँ परंतु इसके सिर को किसी दूसरे जीवित प्राणी जोड़ना होगा। माता पार्वती मान जाती हैं। 

शिव जी नंदी को आदेश देते हैं जिस प्राणी का सिर पहले दिखे उसका सिर काटकर ला लेना। नंदी को जंगल मे हाथी का एक बच्चा दिखता हैं वह उसका सिर कट कर ले जाता हैं। शिव जी वह सिर जोड़कर गणेश को जीवित कर देते हैं । शिव जी गणेश को आशीर्वाद देते हैं यदि कोई नया कार्य का शुभारंभ करेगा तो तुम्हें जरूर याद करेगा। 

मूषक और गणेश जी की कहानी 

एक बार एक भयानक राक्षस गजमुख दुनिया का सबसे शक्तिशाली और और बलवान राक्षस बनना चाहता था। उसने काफी तपस्या की। उसकी तपस्या को देख कर शिव जी बहुत खुश हुए और उसे बहुत से दैविक शक्ति दे दिया। 

अब गजमुख अपनी शक्तियों का गलत उपयोग करने लगा। वह दूसरे अन्य देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करने लगा। गजमुख चाहता था सभी उसकी पूजा करे। गजमुख से परेशान होकर अन्य देवता शिव जी के पास पहुँचे। शिव जी ने गणेश को गजमुख के पास भेजा। 

गजमुख और गणेश जी के बीच लंबा युद्ध हुआ। गजमुख हार नहीं माना और मूषक बनकर गणेश जी पर आक्रमण कर दिया। गणेश जी गजमुख के पीठ मे बैठ गए और उसे हमेशा के लिए मूषक बना दिया। अंत मे मूषक का घमंड टूट गया और वह गणेश जी की सवारी बन गया। 

कार्तिकेय और गणेश जी की कहानी 

एक बार सभी देवता शिव जी के पास मदद के लिए पहुँचे। शिव जी सोच मे पड़ गए की दिनेश और कार्तिकेय मे किसे देवताओं की मदद के लिए भेजे। शिव जी ने दोनों एक कार्य दिया। कार्य यह था जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वह देवताओं की मदद करेगा। 

कार्तिकेय के पास उसका सवारी मयूर था। वह अपने सवारी के साथ दुनिया की सिर के लिए निकल पड़ा। गणेश जी सोच मे पड़ गए की मेरा सवारी तो मूषक है मैं कैसे इतनी जल्दी दुनिया की परिक्रमा कर सकता हूँ। शिवजी ने गणेश से पूछा की तुम यही क्यूँ हो। गणेश जी ने इसका उत्तर  देते हुए कहा पिता श्री मेरे लिए आप और माता ही मेरा संसार हैं। यह कहते हुए उसने शिव जी और पार्वती माता की परिक्रमा शुरू कर दी और कुल सात परिक्रमा की। 

गणेश जी की चतुराई से शिव जी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया की जो कोई तुम्हारी पूजा करेगा उसे बुद्धि, सुख और तरक्की प्राप्त होगी। कार्तिकेय के लौटने के पश्चात गणेश जी को देवताओं के मदद के लिए भेज दिया। 



आपने गणेश जी की कहानी से क्या सीखा 

उम्मीद हैं आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। इस पोस्ट मे मैंने आपको 3 सबसे मजेदार गणेश जी की कहानी के बारे मे बताया हैं। उम्मीद हैं आपको गणेश जी की इन कहानियों से सीख मिली होगी। आपको इस कहानी से क्या सिख मिली हमें कमेन्ट मे जरूर बताए । ऐसी ही जानकारी पाने के लिए ब्लॉग सबस्क्राइब जरूर करें। 
 

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